
सेंधवा ।
खान्देश और निमाड़ क्षेत्र (सेंधवा व आसपास) में महाराष्ट्रीयन एवं स्थानीय समाज द्वारा कुलस्वामिनी कानबाई माता का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
माता की पूजा-अर्चना और एक दिन के रात्रि जागरण के बाद, भक्तों ने नाचते-गाते और ढोल-ताशों की गूंज के बीच नम आंखों व भारी उत्साह से माता को विसर्जन स्थल तक पहुँचाकर विदाई दी।
उत्सव और आकर्षण ।
उत्सव और विदाई के मुख्य आकर्षण पारंपरिक अनुष्ठान: घरों और सार्वजनिक पंडालों में माता की स्थापना कर विशेष ‘रोट’ का नैवेद्य चढ़ाया गया।रात्रि जागरण: भक्तों ने रातभर जागकर पारंपरिक देवी गीत गाए और आराधना की।विसर्जन यात्रा: ढोल-ताशों, डीजे और पारंपरिक नृत्यों (फुगड़ी) के साथ माता की शोभायात्रा निकाली गई।भावुक विदाई: लोक कल्याण और अच्छी बारिश की कामना करते हुए भक्तों ने अगले बरस फिर आने का आह्वान कर माता को विदा किया।